वक़्त बुरा जब आता है तो रह रह कर चिल्लाते लोग
स्वार्थ हुआ पूरा जैसे ही सस्ते में बिक जाते लोग
चाहे जितने महल बना ले लूट-लूट कर घर भर ले
कालचक्र के भँवर जाल में तिनके से बह जाते लोग
बड़ी-बड़ी डिगरियाँ ज्ञान की वहाँ धरी रह जाती हैं
जहाँ व्यवस्था अंधी होती तिकड़म वहाँ भिड़ाते लोग
भोला बचपन चौराहों पर जूठन चाट-चाट जीता
कुत्ते घुमा रहे कारों में तनिक नहीं शरमाते लोग
-डा० जगदीश व्योम
स्वार्थ हुआ पूरा जैसे ही सस्ते में बिक जाते लोग
चाहे जितने महल बना ले लूट-लूट कर घर भर ले
कालचक्र के भँवर जाल में तिनके से बह जाते लोग
बड़ी-बड़ी डिगरियाँ ज्ञान की वहाँ धरी रह जाती हैं
जहाँ व्यवस्था अंधी होती तिकड़म वहाँ भिड़ाते लोग
भोला बचपन चौराहों पर जूठन चाट-चाट जीता
कुत्ते घुमा रहे कारों में तनिक नहीं शरमाते लोग
-डा० जगदीश व्योम
No comments:
Post a Comment