भेड़ को
लाख समझाओ
कि
अपना रवैया बदलो
जिधर सब जा रही हैं
उधर नहीं
वरन, अपनी आँखों से
देखकर चलो
अपने कानों से सुनो
और
अपना रास्ता स्वयं चुनो
सबके साथ
बिना सोचे यूँ ही जाओगी
तो,
अपने बाल नुचवाओगी
एक के
गड्ढे में गिरते ही
सबकी सब गिर जाओगी
बेमौत मारी जाओगी
तुम्हारे द्वारा चुना हुआ
तुम्हारा प्रतिनिधि
चुनते ही
भेड़ से भेड़िया हो जाता है
और फिर
चापलूस सियारों से घिर जाता है
मगर
तुम तो वही करोगी
जो सब करेंगे
फिर
उसके अत्याचारों से
क्यों रोती हो ?
आखिर वही तो काटोगी
जो तुम स्वयं बोती हो
तुम्हारी एकता
एक ज़िन्दा मिसाल है
फिर भी
तुम्हारा ये हाल है
तुम्हारी एकता
सिर्फ अत्याचार सहने के लिए है
सिर्फ अत्याचार सहने के लिए
तुम्हें तो अपनी बोटियाँ
भेड़िये से नुचवाने में
मज़ा आता है
वह एक
तुम अनेक
फिर भी
उसके अत्याचारों को
वरदान समझ कर सहती हो
सबकी सब सिर झुकाये
चुपचाप देखती रहती हो
सोचती रहती हो कि
अभी "हम तो बचे हैं"
कमबख़्तो, इंतज़ार करती हो कि
हमारा कब नम्बर आये...
और फिर
जब
कोई भेड़ ही बन जाये
तो फिर उसे
भेड़िये से कौन बचाये
क्यों बचाये
किसलिए बचाये...
-डा० जगदीश व्योम
लाख समझाओ
कि
अपना रवैया बदलो
जिधर सब जा रही हैं
उधर नहीं
वरन, अपनी आँखों से
देखकर चलो
अपने कानों से सुनो
और
अपना रास्ता स्वयं चुनो
सबके साथ
बिना सोचे यूँ ही जाओगी
तो,
अपने बाल नुचवाओगी
एक के
गड्ढे में गिरते ही
सबकी सब गिर जाओगी
बेमौत मारी जाओगी
तुम्हारे द्वारा चुना हुआ
तुम्हारा प्रतिनिधि
चुनते ही
भेड़ से भेड़िया हो जाता है
और फिर
चापलूस सियारों से घिर जाता है
मगर
तुम तो वही करोगी
जो सब करेंगे
फिर
उसके अत्याचारों से
क्यों रोती हो ?
आखिर वही तो काटोगी
जो तुम स्वयं बोती हो
तुम्हारी एकता
एक ज़िन्दा मिसाल है
फिर भी
तुम्हारा ये हाल है
तुम्हारी एकता
सिर्फ अत्याचार सहने के लिए है
सिर्फ अत्याचार सहने के लिए
तुम्हें तो अपनी बोटियाँ
भेड़िये से नुचवाने में
मज़ा आता है
वह एक
तुम अनेक
फिर भी
उसके अत्याचारों को
वरदान समझ कर सहती हो
सबकी सब सिर झुकाये
चुपचाप देखती रहती हो
सोचती रहती हो कि
अभी "हम तो बचे हैं"
कमबख़्तो, इंतज़ार करती हो कि
हमारा कब नम्बर आये...
और फिर
जब
कोई भेड़ ही बन जाये
तो फिर उसे
भेड़िये से कौन बचाये
क्यों बचाये
किसलिए बचाये...
-डा० जगदीश व्योम
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