बहते जल के साथ न बह
कोशिश कर के मन की कह
कुछ तो खतरे होंगे ही
चाहे जितना छिपकर रह
मौसम ने तेवर बदले
होगी कुछ तो खास वजह
लोग तुझे कायर समझें
इतने अत्याचार न सह
कोशिश कर के मन की कह
कुछ तो खतरे होंगे ही
चाहे जितना छिपकर रह
मौसम ने तेवर बदले
होगी कुछ तो खास वजह
लोग तुझे कायर समझें
इतने अत्याचार न सह
झूठ कपट मक्कारी का
चारण बनकर ग़ज़ल न कह
-डा० जगदीश व्योम
-डा० जगदीश व्योम
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