12 September, 2018

बहते जल के साथ न बह

बहते जल के साथ न बह
कोशिश कर के मन की कह

कुछ तो खतरे होंगे ही
चाहे जितना छिपकर रह

मौसम ने तेवर बदले
होगी कुछ तो खास वजह

लोग तुझे कायर समझें
इतने अत्याचार न सह

झूठ कपट मक्कारी का
चारण बनकर ग़ज़ल न कह


-डा० जगदीश व्योम

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