दीप की वर्तिका जगमगाती रहे
ज्योति हर पल अँधेरे भगाती रहे
स्नेह भर-भर जालाओ दिये इस तरह
रोशनी व्योम में खिलखिलाती रहे
-डॉ० जगदीश व्योम
ज्योति हर पल अँधेरे भगाती रहे
स्नेह भर-भर जालाओ दिये इस तरह
रोशनी व्योम में खिलखिलाती रहे
-डॉ० जगदीश व्योम
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