दीप के पर्व पर
दीप की वर्तिका
स्नेह से स्निग्ध होकर
जले इस तरह
बह चले
ज्योति की एक भागीरथी
और उसमें
नहाने लगे ज्योत्सना
हर नगर
हर डगर
हर तरफ व्योम पर
खेत खलिहान में
घर में
आँगन में
हर एक इंसान में
ज्योति के पर्व की है
यही कामना
दीप के पर्व की
कोटि शुभकामना
-डॉ० जगदीश व्योम
दीप की वर्तिका
स्नेह से स्निग्ध होकर
जले इस तरह
बह चले
ज्योति की एक भागीरथी
और उसमें
नहाने लगे ज्योत्सना
हर नगर
हर डगर
हर तरफ व्योम पर
खेत खलिहान में
घर में
आँगन में
हर एक इंसान में
ज्योति के पर्व की है
यही कामना
दीप के पर्व की
कोटि शुभकामना
-डॉ० जगदीश व्योम
No comments:
Post a Comment