29 June, 2015

हिरना क्यों उदास मन तेरा

हिरना !
क्यों उदास मन तेरा
अभी बची वाकी हरियाली
उजड़ा नहीं वसेरा

कुछ नन्हें विरबे मुरझाये
कुछ वनचर घबराये
सहमे-सहमे तोता मैना
कुछ भी बोल न पाये
बूढ़ा बरगद
खड़ा अकेला
अवसादों ने घेरा

जंगल में मंगल होगा
ये सपने गए दिखाये
सिंहासन मिल गया
भला फिर
वादे कौन निभाये
जाने कौन घड़ी रुख बदले
फिरे हवा का फेरा
हिरना !
क्यों उदास मन तेरा

-डा० जगदीश व्योम
29-06-2015

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