11 January, 2015

गीत की गति

-डा॰ जगदीश व्योम

कितना करो विरोध
गीत की गति को
कौन रोक पायेगा

गीत मेड़ पर
उगी दूब है
जो अकाल में भी
जी लेती
गीत खेजड़ी की
खोखर है
जीवन-जल
संचित कर लेती
जब तक हवा
रहेगी ज़िन्दा
हर पत्ता-पत्ता
गायेगा

गीतों में है
गंध हवा की
श्रम की
रसभीनी सरगम है
गौ की आँख
हिरन की चितवन
गंगा का
पावन उद्गम है
जिस पल रोका गया
गीत को
सारा आलम
अकुलायेगा

गीतों में
कबीर की साखी है
तुलसी की चौपाई है
आल्हा की अनुगूँज
लहरियों में
कजली भी लहराई है
गीत
समय की लहर
रोकने वाला
इसमें बह जायेगा

-डा० जगदीश व्योम








2 comments:

Abuu said...

Nice

Vandana Ramasingh said...

गीत खेजड़ी की खोखर है ..
बहुत सुन्दर हैं आपके गीत आदरणीय