27 September, 2011

थोड़ी गरमी कम कर दो

-डॉ0 जगदीश व्योम

सूरज दादा !
सूरज दादा !
थोड़ी गरमी कम कर दो
धरती जलने लगी तवे सी
थोड़ी गरमी कम कर दो !
 
पशुपक्षी हैं कितने व्याकुल
तुम तो स्वयं देखते हो
सूख गए हैं तालतलैया
थोड़ी गरमी कम कर दो !
 
गरमगरम लू दिन भर चलती
घर में कैद हो गए हम
मन करता है खेलूँ बाहर
थोड़ी गरमी कम कर दो !
 
पिकनिक की जब बात करुँ
तोमम्मी कहतीगरमी है
क्यों इतने नाराज हो गए
थोड़ी गरमी कम कर दो !
 
क्या गलती हो गई? कि
दादा ऐसे आँख दिखाते हो
कान पकड़ कर माँफी माँगू
थोड़ी गरमी कम कर दो !

No comments: