-डॉ0 जगदीश व्योम
सूरज दादा !
सूरज दादा !
थोड़ी गरमी कम कर दो
धरती जलने लगी तवे सी
थोड़ी गरमी कम कर दो !
पशु–पक्षी हैं कितने व्याकुल
तुम तो स्वयं देखते हो
सूख गए हैं ताल–तलैया
थोड़ी गरमी कम कर दो !
गरम–गरम लू दिन भर चलती
घर में कैद हो गए हम
मन करता है खेलूँ बाहर
थोड़ी गरमी कम कर दो !
पिकनिक की जब बात करुँ
तो‚ मम्मी कहती‚ गरमी है
क्यों इतने नाराज हो गए
थोड़ी गरमी कम कर दो !
क्या गलती हो गई? कि
दादा ऐसे आँख दिखाते हो
कान पकड़ कर माँफी माँगू
थोड़ी गरमी कम कर दो !
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