-डॉ0 जगदीश व्योम
छीनकर खिलौनो को बाँट दिये गम ।बचपन से दूर बहुत दूर हुए हम ।।
अच्छी तरह से अभी पढ़ना न आया
कपड़ों को अपने बदलना न आया
लाद दिए बस्ते हैं भारी—भरकम
बचपन से दूर बहुत दूर हुए हम ।
अँग्रेजी शब्दों का पढ़ना—पढ़ाना
घर आके दिया हुआ काम निबटाना
होमवर्क करने में निकल जाय दम
बचपन से दूर बहुत दूर हुए हए ।
देकर के थपकी न माँ मुझे सुलाती
दादी है अब नहीं कहानियाँ सुनाती
बिलख रही कैद बनी‚ जीवन सरगम
बचपन से दूर बहुत दूर हुए हए ।
इतने कठिन विषय कि छूटे पसीना
रात भर किताबों को घोट—घोट पीना
उस पर भी नम्बर आते हैं बहुत कम
बचपन से दूर बहुत दूर हुए हए ।
1 comment:
बच्चों की पीड़ा को खूबसूरती से व्यक्त किया आपने
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