27 September, 2011

छीनकर खिलौनो को

-डॉ0 जगदीश व्योम
छीनकर खिलौनो को बाँट दिये गम ।
बचपन से दूर बहुत दूर हुए हम ।।
 
अच्छी तरह से अभी पढ़ना न आया
कपड़ों को अपने बदलना न आया
लाद दिए बस्ते हैं भारीभरकम
बचपन से दूर बहुत दूर हुए हम
 
अँग्रेजी शब्दों का पढ़नापढ़ाना
घर आके दिया हुआ काम निबटाना
होमवर्क करने में निकल जाय दम
बचपन से दूर बहुत दूर हुए हए
 
देकर के थपकी न माँ मुझे सुलाती
दादी है अब नहीं कहानियाँ सुनाती
बिलख रही कैद बनीजीवन सरगम
बचपन से दूर बहुत दूर हुए हए
 
इतने कठिन विषय कि छूटे पसीना
रात भर किताबों को घोटघोट पीना
उस पर भी नम्बर आते हैं बहुत कम
बचपन से दूर बहुत दूर हुए हए ।

1 comment:

Vandana Ramasingh said...

बच्चों की पीड़ा को खूबसूरती से व्यक्त किया आपने