10 November, 2022

और बात है

गीत बाँच कर
मंचों पर
ताली बजवाना और बात है
पर, गीतों में
पानी को
पानी कह पाना और बात है

सुविधाएँ
अच्छी लगती हैं
सभी चाहते हैं सुविधाएँ
सुविधा लेकर
सुविधाओं का
मोल चुकाना और बात है
गीत बाँच कर...

यूँ तो
सबकी देखा देखी
उसने भी ऐलान कर दिया
पर
अपने ही निर्णय पर
टिक कर रह पाना और बात है
गीत बाँच कर...

पदक और पैसों की
ढेरी पर चढ़कर
ऊँचे लगते हैं
लेकिन
युग-कवियों का फिर
कुंभन बन पाना और बात है
गीत बाँच कर...

-डा० जगदीश व्योम

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