14 July, 2019

मोर

बगिया में जब आता मोर
सब के मन को भाता मोर

बादल जब पानी बरसाते
खुश हो नाच दिखाता मोर

घिर आती घनघोर घटा जब
तब पिउ–पिउ–पिउ गाता मोर

घूम–घूमकर नाच–नाचकर
सुन्दर पंख गिराता मोर

ककड़ी, खीरा, लौकी, तुरई
खरबूजा खा जाता मोर

घने पेड़ हों जहाँ कहीं 
घर अपना वहीं बनाता मोर

पंख देख कर खुश हो जाता
पैर देख रो जाता मोर 

हमको आता हुआ देख कर
जाने क्यों उड़ जाता मोर

-डा॰ जगदीश व्योम

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