बगिया में जब आता मोर
सब के मन को भाता मोर
बादल जब पानी बरसाते
खुश हो नाच दिखाता मोर
घिर आती घनघोर घटा जब
तब पिउ–पिउ–पिउ गाता मोर
घूम–घूमकर नाच–नाचकर
सुन्दर पंख गिराता मोर
ककड़ी, खीरा, लौकी, तुरई
खरबूजा खा जाता मोर
घने पेड़ हों जहाँ कहीं
घर अपना वहीं बनाता मोर
पंख देख कर खुश हो जाता
पैर देख रो जाता मोर
हमको आता हुआ देख कर
जाने क्यों उड़ जाता मोर
-डा॰ जगदीश व्योम
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