19 August, 2018

जला दिया संविधान

जला दिया संविधान संसद के सीने पर
और तुम बैठकर तमाशा देखते रहे
नफा-नुकसान का लगाते रहे अनुमान
बैठे-बैठे शकुनी के पाँसें फेंकते रहे
भरा हुआ कितना ज़हर इन पुतलों में
तार कहीं और से तुम्हीं तो खैंचते रहे
ऐसे देश द्रोहियों की पीठ ठोंक-ठोंक तुम
देश-भक्त होने का सुआंग रचते रहे


-डा० जगदीश व्योम

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